मोहम्मद यामीन खान
टी.एस. मिश्रा लॉ स्कूल में “सहमति, शारीरिक स्वायत्तता एवं यौन अपराधों की समझ” विषयक कार्यशाला का सफल आयोजन
लखनऊ, 14 अगस्त, 2026। टी.एस. मिश्रा लॉ स्कूल, टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा Association for Advocacy and Legal Initiatives Trust (AALI) के सहयोग से “Understanding Consent, Bodily Autonomy and Sexual Offences under New Criminal Laws” विषय पर आयोजित कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को सहमति (Consent), शारीरिक स्वायत्तता (Bodily Autonomy) तथा नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत यौन अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना तथा इन महत्वपूर्ण विषयों पर सूचित एवं संवेदनशील संवाद को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ नेहा तिवारी ने sexual grooming का लड़कियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर ज़ोर दिया , व्यक्ति की शारीरिक स्वायत्तता, यौन अपराधों से संबंधित कानूनी सुरक्षा तथा नए आपराधिक कानूनों में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े विभिन्न कानूनी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर सक्रिय रूप से विचार-विमर्श किया और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यशाला ने विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को न केवल संबंधित कानूनी प्रावधानों को समझने का अवसर प्रदान किया, बल्कि केस स्टडी के माध्यम से व्यक्तिगत गरिमा, सहमति, सीमाओं के सम्मान और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के प्रति जागरूकता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए टी.एस. मिश्रा लॉ स्कूल तथा Association for Advocacy and Legal Initiatives Trust (AALI) की ओर से सभी विशेषज्ञों, अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में डॉ. शिप्रा मिश्रा (Coordinator) एवं सुश्री छवि मिश्रा (Co-Coordinator) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यशाला का समापन डीन प्रोफ़ Dr. C.P Singh के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ! उन्होंने अपने संबोधन में यह कहा कि कोई भी देश या समाज तब तक विकसित नहीं हो सकता जब तक देश की महिलायें सुरक्षित ना हों। उन्होंने और यह भी कहा की अपने अधिकारों को जानना, व्यक्तिगत सीमाओं एवं सहमति का सम्मान करना तथा कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देना एक न्यायपूर्ण और सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।






