आसिफ निज़ाम
लखनऊ, 20 अगस्त 2026। टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ द्वारा विद्यार्थियों को वैश्विक कानूनी परिदृश्य, अंतरराष्ट्रीय विधिक कार्यप्रणाली तथा भारत और यूनाइटेड किंगडम में कानूनी पेशे की व्यावहारिक बारीकियों से परिचित कराने के उद्देश्य से “Law Beyond Borders: Understanding Legal Practice and Business of Law in the UK” विषय पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय इंटरैक्टिव व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में दो प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए—श्री हरजोत सिंह, Solicitor Advocate, Supreme Court of England and Wales; Called to the Bar, Hon’ble Society of Inner Temple; तथा Advocate, Indian High Courts and the Supreme Court of India, और श्री आयुष प्रताप सिंह, LL.M. Gold Awardee, UK एवं Advocate, Allahabad High Court, Lucknow Bench।
कार्यक्रम का शुभारंभ डीन, फैकल्टी ऑफ लॉ, टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय द्वारा दोनों वक्ताओं के स्वागत एवं परिचय के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को दोनों वक्ताओं की हाल की उल्लेखनीय उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने विशेष रूप से श्री आयुष प्रताप सिंह द्वारा लिस्बन, पुर्तगाल में International Sports Law में हाल ही में प्राप्त अंतरराष्ट्रीय अकादमिक अनुभव का उल्लेख किया। वहीं, श्री हरजोत सिंह को House of Commons, British Parliament में International Jurist Award से सम्मानित किए जाने को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।
डीन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विश्वविद्यालय के उस उद्देश्य का हिस्सा हैं, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय exposure और विधिक पेशे की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराया जा सके। उन्होंने श्री हरजोत सिंह के साथ अपने पुराने अकादमिक संबंध को भी साझा किया और बताया कि वे लखनऊ विश्वविद्यालय के शुरुआती बैचों में उनके विद्यार्थी रहे हैं।
विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि श्री हरजोत सिंह टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिभा और प्रगति पर निकटता से ध्यान देंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए internship और संभावित professional opportunities के अवसर तलाशे जाएंगे।
भारत और यूके में कानूनी पेशे की कार्यप्रणाली पर व्यावहारिक चर्चा
प्रथम सत्र में श्री आयुष प्रताप सिंह ने भारत और यूनाइटेड किंगडम में कानूनी फर्मों के संचालन, कार्यप्रणाली और professional culture के अंतर पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में Trainee Solicitor के रूप में अपने अनुभव तथा भारत में विधिक क्षेत्र में कार्य करने और अपनी कानूनी फर्म स्थापित करने के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की कानूनी फर्मों में भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण, कार्य का delegation, accountability, documentation और technology-driven case management कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने भारतीय कानूनी फर्मों में भी structured working, role-based responsibilities और आधुनिक legal software के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने समझाया कि technology का सही उपयोग केवल कार्य को आसान नहीं बनाता, बल्कि client data, case records, deadlines और institutional knowledge को व्यवस्थित एवं सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
श्री आयुष प्रताप सिंह ने अपने UK, Sweden और Portugal से जुड़े शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए और उन्हें अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपनी संभावनाओं को सीमित नहीं करना चाहिए और “Well के frog नहीं, Ocean के frog बनिए”, अर्थात अपने अवसरों और सोच का विस्तार कीजिए।
तीन दशक की असाधारण यात्रा से विद्यार्थियों को प्रेरणा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री हरजोत सिंह ने अपने तीन दशकों से अधिक लंबे विधिक एवं पेशेवर सफर के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। यूनाइटेड किंगडम में अपने लंबे professional journey और बर्मिंघम की एक प्रतिष्ठित एवं सफल legal practice के संचालन के अनुभव के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विधिक पेशे की बदलती प्रकृति से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि एक सफल वकील बनने के लिए केवल कानून की डिग्री पर्याप्त नहीं है। इसके साथ professional ethics, discipline, communication skills, client management, commercial understanding, adaptability और लगातार सीखने की क्षमता भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अनुभवों के माध्यम से यह समझाया कि आज विधि का क्षेत्र केवल स्थानीय न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर lawyers के लिए अनेक नए अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय exposure प्राप्त करने, नई तकनीकों को अपनाने और अपने professional skills को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
श्री हरजोत सिंह ने टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के प्रति विशेष रुचि व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि वे विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं प्रगति पर निकट दृष्टि बनाए रखेंगे और भविष्य में योग्य विद्यार्थियों के लिए professional तथा internship opportunities तलाशने का प्रयास करेंगे।
वैश्विक मानकों की ओर बढ़ता फैकल्टी ऑफ लॉ
यह कार्यक्रम नए प्रवेशित विद्यार्थियों के साथ-साथ वरिष्ठ बैच के विद्यार्थियों के लिए भी विशेष रूप से उपयोगी रहा। विद्यार्थियों को ऐसे दो विधि विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला, जिन्होंने भारत और विदेश दोनों में शिक्षा एवं विधिक पेशे का अनुभव प्राप्त किया है।
टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय का फैकल्टी ऑफ लॉ विद्यार्थियों को global standards के अनुरूप तैयार करने तथा उन्हें कानून के विभिन्न क्षेत्रों, emerging opportunities और international legal practices से परिचित कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम की सफलता में विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति और उत्साहपूर्ण सहभागिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. शिप्रा मिश्रा, श्री देवांग, सुश्री श्रद्धा तथा अन्य फैकल्टी सदस्यों के प्रयास एवं विद्यार्थियों को प्रेरित करने में उनकी भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय का फैकल्टी ऑफ लॉ विद्यार्थियों को ऐसी academic और professional opportunities प्रदान करता रहेगा, जो उन्हें केवल एक बेहतर कानून विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सक्षम और आत्मविश्वासी विधि पेशेवर बनने के लिए तैयार करें।





