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न्यू लेबर कोड्स पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने वाला भारत का प्रथम विश्वविद्यालय बना टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय का विधि संकाय

लखनऊ, 8 फरवरी 2026: टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय, लखनऊ के विधि संकाय द्वारा “लेबर लॉ 2.0: रीइमैजिनिंग वर्क, राइट्स एंड रेगुलेशन इन द एज ऑफ इंडिया’स न्यू लेबर कोड्स” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। न्यू लेबर कोड्स के लागू होने के पश्चात इस विषय पर इतने व्यापक स्तर पर अकादमिक विमर्श आयोजित करने वाला टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय देश का प्रथम विश्वविद्यालय बनकर उभरा है, जो समकालीन विधिक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हाल ही में लागू न्यू लेबर कोड्स भारत के श्रम कानून ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर चार संहिताओं—कोड ऑन वेजेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड तथा सोशल सिक्योरिटी कोड—में परिवर्तित किया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य पारदर्शी, प्रभावी एवं संतुलित प्रणाली स्थापित करना है, जिससे श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित हो सके, साथ ही व्यवसाय करने में सुगमता भी बढ़े। किसी भी विधायी सुधार की सफलता उसके सही क्रियान्वयन और समझ पर निर्भर करती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहाँ इन संहिताओं के अवसरों, चुनौतियों और व्यावहारिक प्रभावों पर शोध एवं संवाद के माध्यम से विचार-विमर्श किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री राजीव भारती, न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ थे। श्री प्रितीश कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। श्री जी.के. गोस्वामी, पूर्व आईपीएस एवं कुलपति, उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान, जिन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, आकस्मिक कारणों से मुंबई जाने के कारण उपस्थित नहीं हो सके। तथापि, उन्होंने संगोष्ठी की सफलता हेतु अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं, छात्रों को उत्कृष्ट शोध पत्रों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया तथा इस संगोष्ठी से प्रकाशित होने वाली संपादित पुस्तक के प्रति अपनी रुचि व्यक्त की।

देशभर से आए शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं छात्रों ने इस संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल न्यू लेबर कोड्स का विश्लेषण करना था, बल्कि विद्वत्तापूर्ण चर्चा को प्रोत्साहित करना और चयनित शोध पत्रों के माध्यम से एक संपादित पुस्तक प्रकाशित करना भी था।

विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर (डॉ.) सी.पी. सिंह ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि जब भी कोई नया कानून लागू होता है, तब उसके विभिन्न आयामों—व्याख्या, क्रियान्वयन, गुण एवं चुनौतियों—पर शैक्षणिक चर्चा अत्यंत आवश्यक हो जाती है। उन्होंने विश्वविद्यालय के आधुनिक बुनियादी ढांचे, तीव्र प्रगति तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया।

अपने संबोधन में माननीय न्यायमूर्ति राजीव भारती ने विश्वविद्यालय की इस त्वरित और दूरदर्शी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि अनेक श्रम कानूनों का चार संहिताओं में समेकन प्रशासनिक स्पष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के उच्च शैक्षणिक स्तर एवं उत्कृष्ट अधोसंरचना की प्रशंसा करते हुए इस आयोजन का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा संगोष्ठी से प्रकाशित होने वाली पुस्तक के प्रति अपनी उत्सुकता भी जाहिर की।

श्री प्रितीश कुमार ने अपने संबोधन में श्रम कानून से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि न्यू लेबर कोड्स विवादों के समाधान को अधिक प्रभावी बनाएंगे तथा श्रमिक कल्याण और अधिकारों को सुदृढ़ करेंगे। उन्होंने सरकार की दूरदर्शी पहल की सराहना की और इस विषय पर देश में प्रारंभिक अकादमिक चर्चा आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. यू.एन. तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति ने संगोष्ठी को और समृद्ध किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शिप्रा मिश्रा, श्रीमती अन्नपूर्णा त्रिवेदी एवं डॉ. श्रद्धा द्वारा किया गया, जबकि संकाय सदस्यों एवं छात्रों ने आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इस संगोष्ठी की सफलता में डॉ. प्रतीक त्रिपाठी एवं श्री शंभु नाथ मिश्रा की विशेष भूमिका रही।

न्यू लेबर कोड्स के लागू होने के तुरंत बाद इस संगोष्ठी का आयोजन कर टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय ने समकालीन विधिक मुद्दों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ और इसे विधिक शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान बनने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

संगोष्ठी का समापन अत्यंत सकारात्मक वातावरण में हुआ। देशभर से आए प्रतिभागियों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को अत्यंत सफल बनाया तथा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया।

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